चार धाम के दर्शन एक ही गुफा में

           चार  धाम  के  दर्शन  एक  ही  गुफा  में



 Patal Bhuwaneshwar Cave: पाताल भुवनेश्वर गुफा की संपूर्ण जानकारी

    उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर। यह मंदिर रहस्य और सुंदरता का बेजोड़ मेल के रुप में जाना जाता है। समुद्र तल से 90 फीट नीचे इस मंदिर के अंदर प्रवेश करने के लिए बहुत ही संकीर्ण रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। स्कंद पुराण में भी इस मंदिर की महिमा का वर्णन है।

 

 पाताल भुवनेश्वर गुफा कहां पर है/ Patal Bhuwneshwar Cave Location

    पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर आगे में स्थित है जो अपने पौराणिक इतिहास को समेटे हुए है और पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। पर्यटकों के लिए यह गुफा घूमने के लिए एक मुख्य स्थल हुआ करता है।




                        Vedio Credit- Sumit Kumar

 

पाताल भुवनेश्वर गुफा की खोज/ Exploration of Patal Bhubaneshwar Cave                                       

       त्रेता युग में राजा ऋतुपर्णा ने इस गुफा की खोज की थी जिसके बाद उन्हें यहां नागों के राजा अधिशेष मिले, इंसान द्वारा इस मंदिर की खोज करने वाले राजा ऋतुपर्णा पहले व्यक्ति थे।

    इस गुफा की चर्चा नहीं हुई लेकिन पांडवों ने द्वापर युग में इस गुफा को वापस ढूंढ लिया था और यहां रहकर भगवान शिव की पूजा करते थे। पौराणिक कथाओं के मुताबिक कलियुग में इस मंदिर की खोज आदि शंकराचार्य ने आठवीं सदी में किया था।

 

पाताल भुवनेश्वर गुफा में कहां-कहां घूमे/Best Place to visit in Patal Bhuwneshwar Cave

    इस मंदिर में  जाने से पहले मेजर समीर कटवाल के मेमोरियल से होकर गुजरना पड़ता है। कुछ दूर चलने के बाद ग्रिल गेट मिलता है जहां से पाताल भुवनेश्वर मंदिर का अरंभ होता है। यह गुफा 90 फीट नीचे है जो बहुत ही संकरे रास्ते से होकर मंदिर के अंदर जाती है। थोड़ा आगे चलने पर इस गुफा के चट्टान पर कुछ कलाकृति बनाते हैं जो जिसमें 1000 पैरों वाले ऐरावत हाथी के पाव देखने को मिलते है। फिर से चट्टानों की कलाकृति देखने को मिलती है जो नागों के राजा अधिशेष जैसी दिखाई देती हैं। कहा जाता है कि नागो के राजा अधिशेष ने अपने सिर के ऊपर पूरी दुनिया को संभाल कर रखा है। यहाँ पर ऐसी मान्यता है की  गुफा के दर्शन से ही संपूर्ण चार धाम के दर्शन हो जाते हैं।

 

                              चित्र में : ग्रिल गेट

                                                                      


कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर गुफा/How to Reach Patal Bhuwneshwar Cave

By Railway- अगर आप रेलवे के रास्ते यहां आना चाहते हैं तो आपके लिए सबसे करीब टनकपुर रेलवे स्टेशन पड़ेगा। आप चाहें तो काठगोदाम रेलवे स्टेशन से भी यहां आ सकते हैं। 

By Air- अगर आप एयरवेज के रास्ते से यहां आना चाहते हैं तो पंतनगर एयरपोर्ट यहां से 226 किलोमीटर दूर है। उसके बाद आप चाहे तो टनकपुर के रास्ते भी आ सकते हैं या फिर अल्मोड़ा के रास्ते भी यहां पहुंचा जा सकता है।


पाताल भुवनेश्वर गुफा का इतिहास/History of Patal Bhubaneshwar Cave

    पाताल भुवनेश्वर पत्थरो से बनी एक प्राकृतिक गुफा है जो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में नगर से 14 किमी दूरी पर स्थित है। इस गुफा में धार्मिक तथा ऐतिहासिक दर्ष्टी से महत्वपूर्ण कई प्राकृतिक कलाकृतियां स्थित हैं। यह गुफा भूमि से 90 फ़ीट नीचे है तथा लगभग 160 वर्ग मीटर क्षेत्र में विस्तृत है।

    राजा ऋतुपर्णा ने  इस गुफा की खोज की थी वो सूर्य वंश के राजा थे और वो  त्रेता युग में अयोध्या पर शासन करते थे। स्कंदपुराण में वर्णन है कि स्वयं महादेव शिव पाताल भुवनेश्वर में विराजमान रहते हैं और अन्य देवी देवता उनकी स्तुति करने यहां आते हैं। ऐसा भी कहा गया है की राजा ऋतुपर्ण यह जंगल मे हिरण का पीछा करते समय उनको वहां पे उस गुफा के अंदर महादेव शिव समेत 33 करोड़ देवी देवताओ के साक्ष ा त  दर्शन किये थे।    

    पांडवो ने यहां पर दुवापर युग मे चौपड़ खेला और कलयुग मे आदि गुरु शंकराचराय ने 822 ई० के आसपास इस गुफा को देखा था और उन्होंने वहां पर ताम्बे का एक शिवलिंग की स्थापना की थी।         

    गुफा मे प्रवेश के लिए लोगो को लोहे की जंजीरो के सहारे गुफा मे  प्रवेश करना  होता है।  गुफा मे प्रवेश के दौरान रास्ता बहुत ही चिकना और दीवारों से  रिस्ता है। 

     

                    गुफा का प्रवेश द्वार

 

 

      


    गुफा मे प्रवेश के दौरान शेष नाग के सामान एक पत्थर की आकृति दिखाई देती है उसे देख के प्रतीत होता है  की पूरी पृथ्वी को उन्होंने ही पकड़ रखा है।   

     गुफा मे मुख्य आकर्षण का केंद्र वहां पर एक शिवलिंग है जो लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में शिवलिंग की ऊंचाई 1-50 फीट  है और शिवलिंग को छूने की लंबाई तीन  है यहां शिवलिंग को लेकर यह मान्यता है कि जब यह शिवलिंग गुफा की छत को छू लेगा तब दुनिया समाप्त  हो जाएगी। 

 

    कुछ मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने क्रोध के आवेश में भगवान गणेश का जो मस्तक शरीर से अलग किया था वह उन्होंने इस गुफा में रखा था। उनके मस्तिष्क का ब्रह्म कमल से अभिषेक किया गया था जिसके के अवशेष आज तक मौजूद है। 

       भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक

             Pic Credit- TV Tube Amazing world

 

फिर कुछ दूर चल कर केदारनाथ बद्रीनाथ के दर्शन करने को मिलते हैं  उसके बाद थोड़ा आगे चलकर काल भैरव की जीभ और भगवान शिव के रौद्र रूप के दर्शन मिलते हैं

फिर थोड़ा आगे चलकर मां चंडी के रण  पार  दर्शन प्राप्त होते हैं उसके ऊपर भगवान शिव का आश्रम है

फिर कुछ दूर चल कर चार द्वार मिलते हैं पहला है धर्म का द्वार दूसरा है मोक्ष का द्वार तीसरा है रण का  द्वार और चौथा  है पार का द्वार

        रण और पार द्वार बंद हो गए हैं फिर उसके बाद हम आगे बढ़ते हैं

तब हमें कल्पवृक्ष का दर्शन होता है फिर एक कदली वन वाला मार्ग है इससे भीम  गए थे कमल के पुष्प लेने के लिए उसके बाद है कामधेनु गाय जिसका थन लटकते  हुए दिखाई देता है जिससे दूध  की धाराएं बहती थी मगर कलयुग में वह अदृश्य बताया गया है मगर उसमें से आज भी जल गिरता  है

      इसके नीचे ब्रह्म कपाली है जहां पितरों का पिंडदान किया जाता है           

    आगे जाने के बाद हमें हंसों का जोड़ा देखने को मिलता  है जिन्हे  अमृत की पहरेदारी में रखा गया था लेकिन उनके मन में उस अमृत के प्रति लालच आ गया उसके बाद भगवान शिव ने उन्हें श्राप दे दिया था उनकी गर्दन आज भी टेढ़ी  दिखाई देती है

 

     आगे चलकर हमें भगवान शिव की जटाये  दिखाई देती है जिससे गंगा बहती दिखाई देती है और  नीचे कुण्ड भी  दिखाई देता है जिसे विश्वकर्मा जी ने बनाया था वहीं पर उनके हाथ की प्रतिमा भी बनी  हुई  है 

 

     फिर हमें राजा भागीरथ के दर्शन होते हैं जहां पर वो  तपस्या मे  खड़े हुए हैं राजा भागीरथ अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए गंगा मैया को पृथ्वी पर लाये  थे

 

                      Pic Credit- By Dev Dham Yatra

    भगवान शिव की जटा से गंगा बहती

 

    फिर हमें मुख्य शिवलिंग के दर्शन करने को मिलते हैं जो कि एक सिद्ध पीठ है इसकी स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी उसमें तांबे का आवरण आदि गुरु शंकराचार्य ने चढ़ाया था और हमें उस शिवलिंग पर तीन प्रमुख देवताओं जिसमें ब्रह्मा सृष्टि के सर्जन विष्णु पालक और महेश विलय करने वाले देवता है के दर्शन प्राप्त होते हैं 

              

 

                             मुख्य शिवलिंग के दर्शन

                                                                     

                     Pic Credit- TV Tube Amazing world

    

     फिर उसके बाद में पांचों पांडवों की गुफा के दर्शन होते हैं जहां पर पांचों पांडवों ने भगवान शिव के दर्शन करे थे बाद में स्वर्ग का द्वार भी है जहां से युधिष्ठिर के लिए स्वर्ग जाने का वाहन आया था

 

     फिर वहां से लौटते समय हमें चार युग के दर्शन प्राप्त होते हैं जहां त्रेता द्वापर कलयुग   कलयुग के बारे में कहा जाता है कि हजार साल में एक बार कलयुग का पत्थर बढ़ता है जब कलयुग का पत्थर पूर्ण रूप से बढ़ जाएगा तो कलयुग का अंत हो जाएगा फिर वहां से कलयुग के अंत के बाद चौथे युग का आरंभ होगा उसे सतयुग बताया गया है वहीं से एक द्वार रामेश्वरम की ओर को निकलता है कलयुग में उन मार्गों पर जाना वर्जित बताया गया है अगर कोई मानव पूर्ण रूप से जो कि पवित्र होगा या फिर कोई देवता ही वहां से जा सकता है

      फिर  लौटते समय हमें एक बहुत ही बड़ा मैदान देखने को मिलता है जहां पर हमें ऐरावत हाथी के दर्शन मिलते हैं  ऐरावत हाथी के 1000 पैर  देखने को मिलते हैं

    ऐरावत हाथी भगवान इंद्र की सवारी थी ऐरावत हाथी के पैरों के नीचे भगवान शिव का कमंडल है

    भगवान  शिव के कमंडल के बारे में कहा गया है कि जब हम पूरी  यात्रा कर गुफा से बाहर निकलते हैं तो भगवान शिव के कमंडल के दर्शन कर हमारी यात्रा पूर्ण मानी जाती है इसके बाद हम ऊपर बाहर की ओर को  निकल जाते है       

  


                            हजार पैर वाला ऐरावत हाथी

                             Pic Credit- Patrika

 

 

पाताल भुवनेश्वर में मिलने वाली सुविधाएंFacilities at Patal Bhuwneshwar Cave

 

  यहां पर रुकने के लिए बहुत सारे रिसोर्ट की व्यवस्था बनाई गई है यहां पर रुक कर आप izd`fr के नजारों का आनंद उठा सकते हैं

 

                     प्राकृतिक सौंदर्य


 

 पाताल भुवनेश्वर गुफा का पूरा इतिहास देखें वीडियो मेंPatal Bhuwneshwar history in Vedio

                                                                                         

                                                    

                    Vedio Credit- Harshit Tewari

               Information provided- by Pujari Mahesh Singh Bhandari

 

पाताल भुवनेश्वर गुफा की कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां वीडियो में देखें/Watch some other important information of Patal Bhuwneshwar cave in the video

 






Comments

  1. Good job dear .I wish you all the best for this new beginning....keep growing 💗

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  2. Good information for all those who want to visit this place thank you
    Keep it up! So that we can keep getting such information in future also.

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  3. Mst h bhai jai mata di✌️✌️

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  4. nice piece of work. It helps us to know about our temples history and culture.

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  5. बहुत खूबसूरत दिखने वाला दृश्य

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